संदेश

अगस्त, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

kavita

गोलकुंडा -------------------- सात परकोटों के पीछे रहते थे निजाम अपनी रियाया की परछाइयों से बहुत दूर तब भी अब भी रहते हें ज़ेड श्रेणी के सुरक्षा चक्र के बीच टेड़े मेडे रास्तों से बनाया गोलकुंडा का किला जहाँ कुछ भी न था वहाँ बस्तियां है जहाँ महल थे वहाँ खंडहर हैं ...

कविता

सच     जब भी आता है संकट  इंसान याद करता है   माँ और ईश्वर को   माँ को ईश्वर से ज्यादा प्यारा है इंसान  वह आ भी जाती है  लेकिन ईश्वर कभी नही आता फिर भी  इन्सान आस्था ओढ़े  बाट देखता है ईश्वर की !!