नाट्य समीक्षा : मनुष्य की आशा कभी नहीं खूटती
नाटक 'हुंकारों' का एक दृश्य मनुष्य की आशा कभी नहीं खूटती जवाहर कला केंद्र, जयपुर के ‘रंगायन’ सभागार में ‘उजागर ड्रामेटिक एसोसिएशन, जयपुर द्वारा मोहित तकलकर के निर्देशन में 6मार्च,2022 को ‘रसरंगम’ में ‘हुंकारों’ नाटक का मंचन किया गया | विजयदान देथा(बिज्जी), अंकित खंडेलवाल और अरविन्द सिंह चारण की कहानियों पर आधारित और तीन भाषाओँ(राजस्थानी,हिंदी और पंजाबी ) में गुंथे संवाद, इस किस्सागोई शैली में मंचित नाटक, कला का अलग आयाम दर्शकों के सामने रखता है | नाटक बिज्जी की कहानी ‘आशा अमर धन’ से शुरू होता है और इसी कहानी के साथ ख़त्म होता | नाटक का मुख्य सन्देश उम्मीद यानी आशा का है | ‘हुंकारों’ यानी जब कोई कहानी या किस्सा सुना रहा है तो उसे सुनने वाले द्वारा दी गई वह प्रतिक्रिया है जिससे पत...